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सच्ची दोस्ती की कहानी । Heart touching friendship story

 

Heart touching friendship story hindi नमस्कार दोस्तों, आज मे एक अनोखा दोस्ती की कहानी लेकर आया हु। दोस्ती क्या है और कैसी होनी चाहिए आप को इस स्टोरी मे पता चलेगा।Heart touching friendship story in hindi.

                    

Heart touching friendship story hindi
Heart touching friendship story hindi

                            दो दोस्त

      21 साल की अतुल शहर जा रहे है। गाँव थोरी बहत पड़कर अब अतुल शहर जा रहे है काम करके पैसा कमाने के लिए। शहर जा रहा है तो साथ मे कुछ पैसा भी है।  ये कहानी तब की जब गाँव से शहर जाने के लिए कोई गरी नही होती थी तो अतुल को पैदल ही जा रहे थे। रास्ते मे एक जंगल भी पड़ते है। जुग्ले की एक बड़े पेड़ के नीचे थोरे समय के लिए आराम करने के लिए बैठ गए।

      उसी की उम्र का लड़का उसी रास्ते से जा रहे थे। अतुल को देखा तो उसके पास आए। दोनों की बैट शुरू हुआ और एक दूसरे को अपना नाम बताया। उस लड़के नाम था अब्दुल्लाह। वो भी शहर जा रहे हिय पैसा कमाने के लिए। दोनों के लक्ष्य है पैसा कमाना।

      Heart touching friendship story अतुल और अब्दुल्लाह दोनों के बीच मे कुछ ही समय मे ही अच्छी दोस्ती हो गई थी। फिर से कहने के लिए जाने से पहले डन वादा कीये दोनों ही एक साथ रहेंगे। कभी भी जुदा नही होंगे। कुछ ही समय मे ऐसी दोस्ती हो गई थी। 

      दोनों पेड़ की नीचे बैठकर ही बाते कर रहे थे तभी कुछ लूटेर आके उन दोनों को घेर लिया। लूटेरे के सर्दार ने कहा , “हमारा आराध्या देवी मा को बलि देने के लिए एक इंससन को खोज रहा हु। तो तुमलोग ही बताओ तुम दोनों मे से किसको साथ मे ले जाओ। अगर भागने की कोशिश की तो दोनों को ही ले जाओंगा।


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      दोनों दोस्त आपस मे बात कर रहे थे। दोनों ही भगवान पे पुर बिस्वास  रखते है। दोनों जो शपत ली है वो याद आ जाते  है। 

      “ इस हाल मे तुमको अगर मे मुसीबत मे डालकर चल जाओं तो भगवान मुझे कभी माफ नही करेंगे। तो मे ही इन लोगों के साथ जाता हु। तुम चले जाओ नही दोनों ही मुसीबत  मे फ़ज जाएंगे। और को भी नही जा पाएगा”। अतुल ने अब्दुल्लाह से कहा।

      “अगर मे भाग जाता हु तो खुद मुझे कभी माफ नही करेगा। इनलोगों नके साथ मे ही चल जाता हु , तुम शहर चले जाओ”। अब्दुल्लाह ने कहा।

      ऐसे ही एक दूसरे को बोल रहे थे। उनदोनों की बात सुनते हुए सर्दार ने कहा,”और कितनी समय बात करोगे, देर हो रहा है।

      मे तुमलोगों साथ जाओंगा, इसको तुमलोग जाने दो। अब्दुल्लाह ने कहा।

      अतुल ने कहा, नही मे ही तुमलोगों के साथ जाओंगा तुम इसको छोर दो।

sachi dost ki kahani       

सर्दार अशर्य हो गए। मरने के लिए दोनों ही राजी। पर क्यू ये जानने की कोशिश नही की। सर्दार ने बोला, तुमलोगों की तरह आजतक ऐसा कोई इंससन नही मिला। तो ठीक है दोनों ही चोलो। तुम दोनों मे से एक को इस पूर्णिमा मैं बलि दूंगा दूसरे को दूसरे पूर्णिमा मे बलि दूंगा। देवी मा इससे बाट ही खुश हो जाएंगे। हमारा बहत ही मंगल होगा। सर्दार दोनों को ही अपने अड्डे पर ले गए।

      अब्दुल्लाह अतुल को पूछा, ये सच है एक इंससन दूसरे इनसान  को बलि देने से देवी सच मे खुश होते है क्या?

      बेकार की बाते ही ये सब। अंधबिस्वास है। अतुल ने अब्दुल्लाह से  कहा।

      अगले दिन जब सर्दार उन दोन के पास आए तो दोनों ने कहा, “ पूर्णिमा आने मे और काफी दिन बाकी है। इन दिनों मे तुम हमारे से बहत कुछ जान सकते हो। हमलोग बहत कुछ जानते हो जो तुमलोग नही जानते हो। वो सब जानोगे तुमको ही बहत फायदा होगा”।

       सर्दार थोरे समय सोचकर उन दोनों की बात मान लिया। सबसे पहले अतुल और अब्दुल्लाह ने उन लोगों को खाना बनाना सिखाने  लगे। जंगली खाना की तुलना मे सुआदिष्ट खाना कहकर बहत ही खुश हो गए। और कहा, “ आजतक ऐसी कहना हुमने इससे से पहले कभी नही खाई। सिखादों हम मे से दो तीन को”।

        खाना बनाना सिखाने के साथ मे उन लोगों नीती बाते बोलने लगे कहानी की मद्यम डसे। एक कहानी बोलते है और उसके साथ मे कानी की बखया भी बोलते है। ये सब बाते सुनके जंगलिओ के मन मे सच्ची ज्ञान की उदय हो ये प्रयास कर रहे है।

        उन दोनों की बाते को सुनक्सर उन जंगलिओ के मन मे एक परिबर्तन आए। सब के साथ गुल मिलके बाते करते करते एक जंगली युवती को अतुकल से प्यार हो गया। और एक अब्दुल्लाह को। दोनों को अलग अलग से मिलकर दोनों युवती ने कहा, “ तुम वादा कोरों की तुम मुझसे शादी कोरोगे तो तुमको इस घने जंगल से बाहर ले जाओंगी”। दोनों दोस्त एक दूसरे को छोड़कर नही जाना चहेते है। तो दोनों ने ही मन कर दिया और सर्दार को सब कुछ बता दिया।

      जंगली सर्दार दोनों लड़कियों को बुलाकर बहत डाटा। दोनों दोस्त की इस बिस्वास को देख कर सर्दार बाट ही खुश हुए। तुमलोगों की बातों को सुनकर ऐसा लगता है की नरबली देना कितनी भूल है। लेकिन हमे डर है की अगर नरबली नही दी तो देवी मा करुधित हो जाएंगे। हमारे बंश को खतम कर देंगे।

      “कोई भी देव या देवी नरबली को पसंद नही करते है। ये सब अंधबिस्वास अगर दूर कर देते हो तो तुमलोग भी हमारे तरह सुखी रह सकते हो”, अब्दुल्लाह ने सर्दार से कहा।

       मुझे प्रमाण देना होगा की नरबली न देने से मा देवी नाराज नही होंगे”। ये बोलके सर्दार वोह से चला गया । do dost ki kahani. 

       अतुल और अब्दुल्लाह सोचने लगे कैसे सर्दार को प्रमाण दे की नरबली देना गलत है। काफी सोचने के बात एक तरकीब खोजी। अगले दिन जब सर्दार उनलोगों के पास आए तो उनलोगों ने कहा,” पूर्णिमा के दिन देवी के सामने बाली देते हो तो एक दिन के लिए वो तलवार देवी के चरणों मे रसखनस होगा। अगर देवी बलि चहेते है तो हमरी मृत्यु होगी अगर न चहेते है तो हमारी मृत्यु नही होगी।

        दोनों की बात सुनकर सर्दार को थोर अजीब लगा। ठीक है अगर देवी ने बलि नही चाहिती है तो तुमलोगों की बलि नही दी जाएगी।

        अतुल और अब्दुल्लाह बाट समय तक तलवार को चुंबक से रागर के तलवार को एक शक्तिशाली चुंबक  बना लिया है।उसी तरह एक लोहे की रिंग को भी ऐसा ही किया । उस रिंग को गले मे पहन लिया । उसके बाद परीक्षा किया की ये काम करता ही की नही। उन दिनों ने बिज्ञान की एक तकनीक को काम मे लगाकर इतना जोखिम  उठाया।चुंबक की अकढ़न शकती की तरह बिकर्षण शक्ति भी होती है। तलवार को रिंग के पास जाते ही बिकर्षण शक्ति के कारण तलवार जोर से दूर हो जाता है। अगर ये तकनीक काम अगए तो सर्दार की मन से अंध बिस्वास निकाल जाएगा। नही तो अतुल की मृत्यु बेकार हो जाएगा।

       पूर्णिमा भी आ गया और अतुल बलि के लिए तैयार है। जैसा सोच थ उन दोनों ने ठीक वैसा ही हुआ। एक बार ,दो बार, तीन बार मारने की कोशिश की सादर ने अतुल को। पर हर बार तलवार पीछे को और दूर हो जाता है। सर्दार को यकीन हो गया की देवी बलि नही चाहेते है। सर्दार दोनों की पेड़ मे गिरकर कहा , “ तुमलोग महान हो हमारा देवी की इच्छा-अनिच्छा हुमसे ज्यादा जानते हो।हमलोग नरबली को त्याग करके एक सुंदर जीवन बिताना चहेते है। पर यह भी एक समस्या है।  हमारे पास कोई धन नही है। जो जीवन चलाने के लिए जरूरत है। तुम लोग हमारा कुछ मदद करो। पास मे ही एक गुहा है। वो गुहा मे एक राक्षस रहेट है। पर हम से कोई आजतक नही देखा है। पर हमने सुना है। और हमने ये भी सुना है की वो गुहा मे बाट सोना चांदी है। अगर कोई उस गुहा मैं जाते है तो वो वापिस नही आती है। हमारा बिस्वास है तुम दोनों उस गुहा मे जा सकते हो और वपईस भी आ सकते हो।

      सर्दार को शांत करके कहा ठीक है हम उस गुहा मे जाएंगे। जंगली सरदार दो डोसस्त को रास्ता दिखाकर वापिस चले गए। गुहा की अंदर बहत ही अंधकार था। दो दोस्त हिम्मत करकर आगे बड़ने लगे। अचंबक से सामने बिजली की तरह रोशनी हो गई। देखा की सामने एक बहत खूबसूरत लड़की खड़ी है।

      युवती ने ने कहा की ,”जोभी मुझे देखेगा वो अगर जिंदा रहेना चहेते है तो मुझ से शादी करनी होगी। इसलिए मे तुमहरे सामने आई । चोलो हमलोग शादी करेंगे।

       तो फिर मेरे दोस्त का क्या होगा? अतुल ने युवती से पूछा।

      अतुल की सवाल सुनकर युवती हसने लगी। और अब्दुल्लाह जलकर राख हो गया। ये देख कर अतुल रोने लगा और युवती को कहा, “ तुम निष्ठुर हो मे तुमसे शादी नही करूंगा। मुझे भी तुम जलाकर राख कर दो”।


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       मे तो तुम्हारी  दोस्ती की परीक्षा  ले रही थी। तुम दोनों  को अलग करना चाहता था।लेकी नही पर पाया।  अड़बदुलह इसिवक्त जीदा हो जाएगा। यह बोलके युवती अदृश्य हो गए।       

       थोरे देर बाद अब्दुल जिंदा हो गया। अतुल ने सब बताया जो जो अभी हुआ। भगवान के उआपर जिनकी बिस्वास है उनलोगों के साथ कभी गलत  नही होता।

       फिर से दोनों दोस्त आगे चलने लगे। थोरी सी जाने के बाद एक लंबी आदमी को मिला। आदमी दोनों कोगाना गाने को कहा। जिसकी भी गाना मुझे पसंद आएगा उसे खजाना दिखाओंगा और जिक गाना पसंद नही आएगा उसे मे मार दूंगा।

       दोनों गाना गाने लगा, गाना सुनके आदमी नाचने लगे। जब गाना कहां हुआ अतुल जमीन पर घिर पड़ा। अब्दुल्लाह अतुल को मरा देख रोने  लगा। रोते हुए आदमी से कहा- अगर मेरा दोस्त जिंदा नही है तो मे भी जिंदा नही रहना चहेता हु। जल्दी बोलो की मेरा दोस्त की जिंदा कैसे किया जाए।

       आदमी ने अब्दुल्लाह को लेकर एक बड़ा स महल के पास गया। इस महल मे सिर्फ सोना  ही सोना है।इतना सर असोन देख कर अब्दुल्लाह चौक गया। “ये सब सोना तुम्हारा है। क्या अभी भी तुम अपनर दोस्त को वापिस पाना चहेते हो। बोलो?

       अब्दुल्लाह तुरंत जवाब दिया की मुझे मेरे दोस्त वापिस चाहिए। एक पल मे महल गायब हो गए और सामने अतुल खड़ा था।

       जोभी हुआ अब्दुल्लाह ने सबकुछ अतुल को बताया। और एकबार प्रमाण हो गया अगर भगवान की ऊपर भरोसा रकने वाल्व को को कुछ नही होगा।  खुशी से दोनों दोस्त आगे की और जाने लगे।

       कुछ दूर जाने के बाद एक बिशाल  आकर की राक्षस दिखाई दिया। राक्षस अतुल और अब्दुल्लाह को देख कर कहा, “ तुम दोनों की दोस्ती काबिले तारीफ है। पर मे इतना सोच के भी समाज नही पा रह हो की तुम दोनों मे से ज्यादा अच्छा कौन है। तुमलोग ही बताओ तुम दोनों मे से कौन महान है।

     “ हम दोनों मे से महान कौन है यह जाकर तुमको क्या”?कोन हो तुम ? अतुल ने पूछा।

      मुझे पाहार  रखशास कहते है। ये गुहा मेरा ही है। जो भी महान है उसके साथ इस महल के सुंदरी के साथ बिवाह करके सारा सोना  उसको दे दूंगा। और एक को मे खाके पटल मे चल जाओंगा।

      दोनों आपस मे एक सिद्धांत पे आए “अबतक कोई हम दोनों को जुदा नही कर पाया। हमारी दोस्ती इसबर भी नही हारेगा।

      दोनों दोस्त ने एक साथ कहा।,” हम दोनों ही समान है। अगर कोई महान है तो वो है भगवान। भगवान के मर्जी से तुम उस सुंदरी  के साथ जंगली सर्दार की शादी कराओ और सर सोना उसे देहज के के नाम पर उसे दे दो। हम दोनों शहर जायेगे तो हमे शहर जाने का रास्ता बताया दो।

       अचानक से एक रोशनी आया और दोनों को पता ही न चला की क्या हुआ। आख खोलके देखा तो वो दोनों शहर जाने की रास्ते पर है। और लगा की जंगली सर्दार का अच्छा ही होगा। दोनों ने भगवान को शुक्रिया किया और पार्थना किया की उन दोनों की दोस्ती कभी न टूटे।

       जाते जाते रास्ते मे एक तरफ मंदिर और एक तरफ मस्जिद । खुशी से दोनों आगे जाने लगे । अतुल मंदिर की तरफ और अब्दुल्लाह मस्जिद की तरफ।थोरी जाकर दोनों ही रुक गए, “ हम दोनों तो अलग हो रहे है”।

        खुद भगवान भी चिंता मे पर गए, “ मुजसे  पार्थना किया की हम दोनों को कभी अलग मत होने देना। अब मेरे कारण ही दोनों  अलग हो रहे है”     

      

     

     

 

 

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