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Ramsetu bridge hindi। रामसेतु पुल की दिलचस्प बातें

Ramsetu bridge hindi। रामसेतु पुल की दिलचस्प बातें

Ramsetu bridge hindi
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रामसेतु (रामार पालम) तमिलनाडु की दक्षिण पूर्व तट के किनारे रामेश्वरम दीप तथा श्रीलंका के उत्तर पश्चिम तट के मन्नार दीप के मध्य में चुने से बना एक सरिंखला है। भौगोलिक जानकारी के अनुसार किसी समय यह सेतु भारत और श्रीलंका को जोड़ता था।

हिंदू सभ्यता के अनुसार यह सेतु भगवान श्री राम के  वानर सेना थे नाम था नल और नील उनके द्वारा बनाया गया था। आज मैं रामसेतु की कुछ दिलचस्प बातें बताने जा रहा हूं। आपने शायद पहले नहीं सुनी होगी।


=रामसेतु की लंबाई

रामसेतु की लंबाई लगभग 48 किलोमीटर है। यह  मन्नार की खारी और पार्कस्ट्रीट को एक दूसरे से अलग करता है। इतिहासकार पुरातत्व  के मुताबिक इससे कोई चोकाने वाली बात नहीं है। कोरोल और सिलिकॉन पत्थर जब गर्म होते हैं तो उसमे हवा भर जाता है और इतना हल्का हो जाता है कि पानी के ऊपर वेहेने लगता है। ऐसे पत्थर को चुनकर भगवान राम के वानर सेना ने इस पुल को बनाया है।

इस पुल को बनाने के लिए 5 दिन का समय लगा था। सिर्फ 5 दिन में ही यह 48 किलोमीटर लंबा पुल बनकर तैयार हो गया था। अमेरिका के साइंटिस्ट ने कुछ तथ्य के साथ यह दावा किया है भारत और श्रीलंका के बीच में जो पुल है यानी रामसेतु पार्क स्ट्रीट प्राकृतिक रूप से नहीं है। यह पुल मानव निर्मित है यानी कि इंसानों द्वारा बनाया गया था। अमेरिका के साइंटिस्ट को  यह प्रमाण भी मिला है कि रामसेतु के पत्थर करीब 7000 साल पुराना है।

=Ramsetu NASA

नासा से ले गई फोटो ने दुनिया के सामने कोई बार रखे गए हैं।  रामेश्वरम और श्रीलंका के बीच किस तरह से यह पत्थर के रास्ते से जुड़ा हुआ है।

कहा जाता है कि 15वी शताब्दी तक लोग रामसेतु के ऊपर से लोग चढ़कर जाते थे और पारंपरिक बहनों से रामेश्वरम से मन्नार दी तक लोग जाया करते थे।

=Setu Samandharam Leher Project

पर रामेश्वरम के यह रामसेतु कोई विवादों के विषय रह चुका है। भारत में कांग्रेस सरकार के वक्त 2005 में एक प्रोजेक्ट का ऐलान किया गया था जिसका नाम था सेतु समुद्रम लहर(Sethu Samandharam Leher)। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट की लागत थी 2500 करोड़ की गई थी। पर बाद में इस बजट का लागत बढ़ाकर 4000 करोड़ बना दिया गया था। इसके तहत बड़े बड़े जहाज को आने जाने के लिए करीब 38 किलोमीटर लंबे 2-channel बनाए जाने थे । इस परियोजना से सरकार को 2 बड़े फायदे होने वाले थे।

Ramsetu bridge hindi
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पहला फायदा यह थी एक जहाज एक जगह से दूसरे जगह पर जाने के लिए समय में 30 घंटे की कमी आती।
दूसरा फायदा जहाज पर लगने वाले इंदन भी काम खर्च होता।

यह इस चैनल से रामसेतु जिससे एडम ब्रिज भी कहा जाता है उस से गुजरना था। अभी भारत और श्रीलंका के बीच इस रास्ते पर समुद्र की गहराई कम होने के कारण जहाजों को पूरे श्रीलंका के परिक्रमा करने के बाद ही अरब सागर पर आना पड़ता है। इस प्रोजेक्ट के तहत जहाजों को श्रीलंका और भारत के बीच से निकलने की रास्ता बनाए जाना था। ऐसे में कांग्रेस सरकार ने यह ठाना कि वह लोग इस रास्ते को बनाएंगे। उस दौरान बीजेपी की तरफ से एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दर्ज की गई।  इस परियोजना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पर सुनवाई चली। धर्म और आस्था के विषय को देखते हुए प्रोजेक्ट पर रोक लगा दिया गया।

जैसे ही मोदी सरकार आई तो  लोगों की भावनाओं को कदर करते हुए सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार ने कहा कि भगवान राम ने बनाया राम सेतु के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी और किसी और दूसरे रास्ते की खोज की जाएगी।


=साइंस चेनल का दावा: रामसेतु कोई कल्पना नहीं

इतिहासकारों की मानें तो साल 1480 में आई तूफान ने यह पुल टूट गई थी। एक बहुत बड़ा चक्रवर्ती तूफान आया जिसकी वजह से रामसेतु के काफी हिस्सा टूट गया था। जल स्तर समुद्र में उस वक्त इतना भर गया था कि रामसेतु कहीं ना कहीं जल के नीचे दब गया था और उसका बहुत बड़ा हिस्सा टूट गया था।
जिसके प्रांत सीधे तरीकों से रामसेतु की देख पाना मुश्किल हो गया था। लेकिन नासा ने जो तस्वीर जारी की सेटेलाइट जो तस्वीरें आई उस पर रामसेतु दिखा जा सकता है।

वही एक पार्टी की तरफ से बोला गया कि रामसेतु होने की वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है और उनको हिंदू आस्था से भी कोई सामान नहीं है । पर साइंस चैनल ने यह पुष्टि कर दी कि भारत और श्रीलंका के बीच एक पत्थरों से बना रामसेतु मौजूद है। जिसके कारण आज तक सेतु समुद्रम लहर प्रोजेक्ट में रोक लगाई हुई थी। आज भी जहाजों को श्रीलंका की  पूरी परिक्रमा करके ही निकलना पड़ता है।

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