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गायब जहाज की रहस्य । Lost plane ki mystery

Gayab jahaj ki Rahasya- Lost plane ki mystery air France 447 अचानक रेडाईर से गायब हो गया।किसी भी तरह कोई सिग्नल नहीं मिला, कोई इंजन की खराब होने की की कोई वॉइस मैसेज,नहीं कोई और डैमेज की कोई शिकायत फिर भी नजने ये हवाई जहाज कैसे गायब हो गई।  हुआ था ये हादसा,कैसे हुआ ये हादसा, क्यू हुआ हुआ ये गायब प्लेन की रहस्य। और 3साल बाद हुआ एक चमत्कार।और सारे मिस्ट्री की पर्दा फाश हो गया। आइए जानते Air 447 जहाज की रहस्य घटना।
गायब जहाज की रहस्य । Lost posne ki mystery
गायब जहाज की रहस्य । Lost posne ki mystery


*  Gayab jahaj Air Flight 447


 Air Flight 447 31मार्च 2009 ब्राजील के एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रात को 10 बजकर 29 मिनट में पेरिस के लिए उड़ान भरी। इस प्लेन मैं कुल 228 यात्री मजुड थी जो पेरिस जा रहे थे। ब्राजील से पेरिस जाने में लगभग 10 से 12 घण्टे समय लगता है। Air Flight 447 ने लगभग 3 घंटे की उड़ान भर चुका था। ब्राजील के ATC भी लगातार संपर्क बनाए हुए थे।जहाज अब समन्दर के ऊपर से जा रहा था।और तभी ATC से 447 से कनेक्शन टूट गए। समन्दर के बीच में संपर्क टूट जाना कोई बड़ी बात नहीं है। आमतौर पर ऐसी जगह पर ATC से संपर्क टूट ना एम बात है।क्यू के ये ATC के रेंज से बाहर होता है।

    दुसरी और समन्दर के उस पार Senegal ATC से भी flight 447 से संपर्क नहीं बना पा रहे थे।क्यू के इसका भी रेंज भी वहां तक नहीं था। ऐसे में Senegal ATC भी कुछ नहीं कर सकते थे सिवाए इंतेज़ार के अलावा। समय बीत ता गया करीब 30 मिनट के बात भी संपर्क नहीं हो पाया।


     प्लेन के लास्ट लोकेशन को ट्रैक करके fighter प्लेन को ओस एरिया पे सानबिन करने के लिए भेजा गया। लेकिन जहाज कोई अता पता नहीं मिला।सुबह होने तक जहाज के कोई मालवा मिलना सुरु हो गया। ये प्लेन रहस्य तर्को से क्रैश हो चुका था। फ्लाइट 447 के यात्री के इंटेजार करता हुआ ऑन लोगो की रिश्तेदार को ये पता ही नहीं चल पाया। आखिर हुआ क्या उन लोगो को समझना भी बहत मुश्किल था।अचानक प्लेन कैसे क्रैश हो गया।

* गायब जहाज की इन्वेस्टिगेशन


 इस प्लेन कि इन्वेस्टिगेशन के लिए दो टीम को सिलेक्शन किया गया। पहला जहाज के ब्लैक बॉक्स को और दूसरा टीम लाशों को रिकवर करने के लिए। हर दिन लाशों को निकाल कर घरवालों को सौंप दिया जाता था अंतिम संस्कार के लिए।कुछ लाश को तो पहेचान गए और कुछ लाश के कपड़े से पहेचान गए। क्यू के लाश बहत बुरी तरह से जल गए थे। कुछ लोग तो ऐसे भी थे जो अपनों कि लाश तक भी नसीब नहीं सकी।

     16 दिन के खोज के बात 228 लोगो में से सिर्फ 50 लोगो के ही लाश ही रिकवर कर पाए थे। और बाकी हुए लोग और प्लेन की ब्लैक बॉक्स समन्दर की गहराई मै कहीं खो गए थे। और इस गहराई तक खोज करने वाले टीम भी नहीं पहुंच पाते थे। ब्लैक बॉक्स को खोज के लिए न्यूक्लियर सबमरीन का स्टमाल किया। ये सबमरीन ब्लैक बॉक्स से निकले अल्ट्रा सनिक सिग्नल को फाइंड करने कोशिश कर रहे थे। और ये काम भी बहत जल्दी हो रहा था।क्यू के ब्लैक बॉक्स सिर्फ 30 दिनों तक ही सिग्नल वेज सकता है। दिन गुजरता गया हर दिन खाली हाथ के अलावा कुछ नहीं मिलता।12 महीने खोजबीन और 7000 square फीट अरिया खोज बीन के भी ब्लैक बॉक्स का पता नहीं चला।समय बीतने के साथ साथ उम्मीदें भी कम होती गई।

* Gayeb jahaj के 3 साल बात मिला ब्लैक बॉक्स


घटना के 3 साल बात 3 अप्रैल 2011 को एक प्राइवेट टीम WHOI (World Hole Ocean Orgrapic Investigation) ।इस टीम ने एक चमत्कार कर दिखाया ।इस टीम ने अपने टेक्नोलॉजी के द्वारा 30 दिन के अंदर ही ब्लैक बॉक्स को खोज निकाला।
इन्हे पता था कि समन्दर में सान बीन करने से कोई फायदा नहीं होने वाल है। समन्दर के सतह पर गैस या मिट्टी के अंदर कहीं ब्लैक बॉक्स दब गया होगा। इसलिए अनलोगो ने कुछ मशीन पनी के अंदर नीचे बेजा जो फुल्ली ऑटोमेटिक था और इसको रिमोट से भी कंट्रोल किया जा सकता था। इस पनडुब्बी मशीन की खास बात ये है कि ये समंदर की सतह की भी सकें कर सकता है बिल्कुल रडार की की तरह। और ये एक माओ तैयार कर सकता था। कुछ दिन बात जब उनलोगो ने स्कैन कि गई फोटो में जहाज की एक बार हिस्सा समुद्र कि सतह पर दिखाई दिखाई दिया और तुरंत एक टीम वहां पर बेज दिया। थोड़ा सा खोज बीन के बाद  gayeb jahaj की डाटा रिकॉर्डर, वॉइस रिकॉर्डर दोनों को 3 साल बाद रिकवर कर लिया गया।हैरानी की बात तो ये थी कि ऑन लोगो ने सिर्फ 30 दिन के अंदर ही ब्लैक बॉक्स को खुज निकाला।

* अब वक़्त आ गया था 3 साल पहले की रहस्य से पर्दा उठाने की।और जब ब्लैक बॉक्स से जो कहानी पता चला इसे सुनकर इन्वेस्टिगेटर की सोच ही बदल दिया। तो आइए सुनते है गायब जहाज Lost Plane की रहस्यमय के कहानी। या कहे तो गायब जहाज की कहानी।

* गायब जहाज की रहस्य की खुलासा


 इस कहानी कि सुरूवात करते है उड़ान करने की 3 घंटे की बाद से । जब ये जहाज ब्राजील के ATC से संपर्क से बाहर हो गया था। ATC को लग रहा था ये प्लेन हमारे दायरे से बाहर हो गए है। दूसरी तरफ पेरिस के ATC से भी कॉन्टेक्ट नहीं हो पा रहे थे। उन्हें भी ये लगता था कि कुछ मिनट के बाद ही हमसे संपर्क हो जाएगा। असल में flight 447 जहाज एक भयानक मुसीबत मै फस गए थे। हालाकि प्लेन मै wether रडार भी होता है जो पायलट को जानकारी देता है। ये रडार सिर्फ जानकारी ही दे सकता है जहाज की सुरक्षा नहीं कर सकते है। ये तो एक प्लेन है सड़क पे चलती गाड़ी नहीं जो सामने रास्ता खराब है तो बैंक करके पीछे के सकते है। लेकिन हवाई जहाज के साथ ऐसा नहीं होता। अगर हवाई जहाज किसी बादली तूफान मै फस जाए  तो उसे तूफानों के सामना करना ही होगा इस के सिवाय उट कोई रास्ता नही होता है। यह पर सवाल आता है कि पायलट को तूफान के बारे मै कब पता चलता है।और पायलट को पता चल ही गया होगा कि प्लेन बादली तूफान मै फस गए है।


    Flight 447 जहाज तूफान मै फस गया था। बादलों मै होता है डेर सारा पानी जो -40 डिग्री सेल्सियस में आसानी से फ्रेज़ हो सकता है। अबतक तो प्लेन मै सबकुछ ठीक था। सिर्फ ATC से संपर्क टूट गया था। इसकी अब जरुरत भी नहीं थी। कुछ देर बादलों मै उड़ान करने के बाद पायलट को कुछ आवाज़ सुनाई दे रहे थे।आवाज़ थी  बर्फ के टुकड़े की थी जो प्लेन मै टक्कर हो रही थी। इस जहाज को 10 घंटे उड़ान वरना था इसलिए इस प्लेन मै तीन पायलट माजुद थे। इस प्लेन मै सबसे एक्स्पीरियंस पायलट यानी कि कप्तान ने तीन घंटा उड़ान वर चुका था तो वो टेस्ट करने के लिए चेक गए थे। और पूरा कंट्रोल co-pilot के हाथ में था। रात का समय, ऊपर से तूफान,बर्फ का टक्कर की आवाजे से पायलट घबरा गया था। पर डरने की बात अबतक नहीं थी जब ऑटो पायलट अच्छे से काम कर रहा है तब तक तबतक आसानी से तूफानों मै प्लेन आराम से और सकते है। जो बर्फ था इससे बचने के कोई उपाय नहीं था। ये बर्फ के टुकड़ों ने उन senser को फ्रिज कर रहा था जो ऑटो पायलट का जानकारी देता है। अगर इं ऑटी पायलट की सेंसर खराब हो जाए तो तो पायलट अंधा होने के बराबर है। यानी कि ऑटो पायलट काम करना बंद कर देगा। ठीक ऐसा ही हुआ था flight 447 के साथ। अबतक ऑटो पायलट की वजह से प्लेन स्टेबल यानी सीधे चल रहा था। अचानक ऑटो पायलट dis anges होने के कारण जहाज लेफ्ट की और रोल होने लगा था। co-pilot तुरन्त ही मैनुअल कंट्रोल अपने हाथ मै ले लिया और प्लेन को सीधा करने के लिए कोशिश कर रहा था। जहाज अब कभी लेफ्ट कभी राईट की तरह हो रहा था। co-pilot rolling स्टेबल करने मै लगा था।करीब तीन मिनट तक ऐसे ही चल रहा था।
गायब जहाज की रहस्य । Lost posne ki mystery
गायब जहाज की रहस्य । Lost posne ki mystery

    इसके बाद co-pilot ने एक गलती कर दिया। उन्होंने प्लान कि साइट सटीक को पीछे तरफ खींच दिया जिसके कारण जहाज की nose ऊपर होने लगा और प्लेन का antitude बहत तेजी से करने लगा। जब प्लेन का antitude बढ़ना होता है तो  तब प्लेन को 2000 से 3000 फीट स्पीड से उपर ले जाना होता है। पत प्लेन447 7000 फीट पर मिनट से ऊपर हा रहा था वो भी तूफानी बादलों से होते हुए। 

    प्लेन की angel of atack 30 डिग्री तक हो चुका था। ये खतरे की पहेली घंटी थी।प्लेन की nose ऊपर होने से wings मै लिफ्ट मिलना बंद हो गया और तेज़ हवा के वजह से प्लेन drag भी हो रहा था जो प्लेन की स्पीड को स्लो करने लगा था। Co-pilot पहले से ही confiused था ऊपर से कली घने रात, प्लेन की स्पीड, प्लेन का antitiud,ऑटोपिलोट,प्लेन मै बर्फ की टकराने की आवाज़ इं घटनाओं से Co-pilot पहले से ही घबराया हुआ था। साथ मै और एक मुसीबत सामने आगया और वो था स्टोर अलार्म। 

    दोस्तो जब जहाज की nose बहत उपोर चला जाता है तो हवाएं बहत तेजी से प्लेन मै टकराने लगता है और प्लेन को लिफ्ट मिलना बंद हो जाते है।

    Co-pilot ने कहा प्लेन अब मेरे कंट्रोल मै नहीं है। अब दूसरे पायलट ने कंट्रोल अपने हाथ मै ले लिया था। और उन्होंने एक सही डिसिशन लिया उसने प्लेन कि साइड सटीक से प्लेन के nose को डाउन कने लगा। पर Co-pilot ने अभी भी साइड सटीक को पीछे की तरफ खींच ता रहा था। दूसरे पायलट साइड सटीक को आगे की तरफ मूव कर रहा था। दोनों ही पायलट ने विपरीत दिशा मै खींच रहा था।प्लेन कि कंप्यूटर भी कन्फियसड हो गया आखिर बात सुने तो किसकी सुने। पायलट या Co-pilot की।यह पर अलग अलग कमांड के दौरान दुसरे पायलट ने लिया सही सिद्धांत को cencel कर दिया। दूसरा पायलट अब nose को नीचे की तरफ नहीं कर पा रहे थे।जिसके बहाह से प्लेन कि रफ्तार लगातार कम हो रही थी। और Co-pilot अब भी पीछे तरफ ही खींच रहा था। दोनों ही पायलट अब प्लाबे को कंट्रोल नहीं कर पा रहे थे। प्लेन की स्पीड कम और लिफ्ट ना मिलने की वजह से प्लेन एक पत्थर की तरह नीचे की तरफ घिरने लगा था।

    तब एंट्री हुआ कप्तान का जो प्लेन कि सबसे एक्स्पीरियंस पायलट थे।अफसोस उनका आना बहत देर हो सुका था। उन्होंने देखा स्टोल अलार्म कभी ऑन कभी ऑफ हो रहा था। क्यू के प्लेन की सेंसर कभी ऑन और कभी ऑफ हो रहा था। कैप्टन की पहेली चनाती थी कि प्लेन कि nose को नीचे करना तभी जहाज को बचाया जा सकता है।प्लेन का मुंह अब 40डिग्री तक हो गया था। कैप्टन के आने के बाद Co-pilot को ये अहेसास हुआ कि वो साइड सटीक पीछे की तरफ खींच रहा था। और इसकी वजह से ही सारी प्रॉब्लम हो रही है। गलती का आहेसास होते होते बहत डर हो गया था ।जहाज का स्पीड बहत कम हो गया था ,जहाज अब नहीं fly कर रहा था नहीं ग्लाइड कर रहा  था। ये एक पत्थर की तरह नीचे घिर रहा था। और एक अलार्म बज गया ।ये अलार्म मौत की घंटी थी। ये था ground poximetry अलार्म ।ये अलार्म तब बजती है जब जहाज जमीन के अधिक नीचे आ जाता है। पायलट अब चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते थे। कुछ ही समय बाद ये जहाज समन्दर मै टकरा गए बस एक पल मै सबकुछ ख़तम हो गए।

नहाने कितनी घर की जलते हुए दिए को भुजा दिए इस flight 447 ने। यही है इस गायब प्लेन की कहानी।
   
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