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bhanghar fort history in hindi Rahasya। भानगढ़ का इतिहास

bhanghar fort history in hindi Rahasya। भानगढ़ का इतिहास

bhanghar fort history in hindi

भारत के इतिहास ने सदियों से बहत सारे रहस्य एस को देख रहे है । भारत रहस्य से भरा हुआ है। ऐसे भी कोई रहस्य है जो बैज्ञानिक को ने भी हर मान लिया है।खेर आज हम एक रहस्य के बारे मय आपको बताने जा रहा हो जो सदियों से रहस्य बना हुआ है। ये कहानी है राजस्थान में स्थित भानगढ़ के बारे में। ये भारत कि सबसे पेचीदा और सबसे प्रेटवादित स्तन भी कहा जाता है।राजस्थान के सरिस्का जंगल के किनारे है ये भूतिए भानगढ़ का किला।इस जगह की कहानियां बहुत सारे पर्यटक को आकर्षित करता है।हा जो लोग सहोसिक लोग के लिए निराश जनक बात है क्यू के इस जगह पर सूर्यास्त और सुर्यदोय के बीच में प्रवेश करना निषेद है।भारत सरकार के एजेंसीASI दारा यह पर प्रतिबंध लगाया गया है। भारत सरकार ने यह पर अंधेरे के बाद इस जगह पर प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है। इस स्थान को भारत का सबसे दरबान स्थान भी कहा जाता है।

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कहा पर स्थित है
 भानगढ़ खंडहर राजस्थान केमाई जयपुर और दिल्ली के बीच मय ये स्तन स्थित है।भानगढ़ एक ऐतिहासिक स्थल है।यहां पर योग्य भवन गोपीनाथ,शिव(सोमेशवे) मंगला देवी,लबिना देवी,और केशव राय। केमंडिर है।यहां के मुख्य सड़क के किनारे  कोई हवेलियां है है,एक मस्ज़िद और एक महाएल भी है। दो आंतरिक किलेबंदी द्वारा संरक्षित है महल की घाटी।ये किला 1613 साल में बनाया था।

 इतिहास
इस शहर की स्थापना 16 वी शताब्दी के अंत मै भगवंत दास के शासन के दौरान हुई थी।वह सम्राट अकबर के सेनापति मान सिंह। कचोटा भाई था। भानगढ़ का उत्तराधिकारी चतर सिंह था ।1630 मै छतर सिंह  मृत्यु के बाद भानगढ़ किला धीरे धीरे खंडहर मै रूपांतर हो गए। औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य कमजुर हो गया। और जय सिंह द्वितीय ने 1720 मै भानगढ़ पर विजय प्राप्त किया ।  इसके बाद भानगढ़ की आबादी धीरे धीरे कम होती गेए।1783 के समय अकाल होने के कारण यह के लोग भानगढ़ जगह को छोड़ कर चला गया।

 भारत सरकार द्वारा प्रेबेश निषेद
bhanghar fort history  इस  जगह पर प्रवेश करते ही आपको एक सूचना मिल जाती है। बहरत सरकार द्वारा एक बोर्ड लगाया गया।  इसमें कहा गया है कि आप  "सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद भानगढ़ में प्रवेश करना सख्त बरजित है"। और साथ मै नीचे ये भी लिखा गया है की अगर कोई इन निर्देशों का पालन नहीं करने वाले किसी भी व्यक्ति  के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तो आप लोग अगर कभी भी भानगढ़ जाए तो भूल कर भी रात मै ना जाए ।

 यह भारत सरकार के द्वारा मान्यता प्राप्त एकमात्र  "कानूनी रूप से प्रेतवाधित" स्थान है।साइन बोर्ड केवल जगह के आसपास के रहस्य को जोड़ता है।

रहस्य
कहा  जाता है कि ये शहर गुरु भालूं नाथ द्वारा शापित है।जब ये शहर निर्माण हुए था तब कुछ शर्त पर गुरु भालू नाथ ने ये शहर निर्माण की अनुमति दी थी  कि शहर की परछाई इसकी डायन करने की जगह को ना छुए नहीं तो शहर पर कोई नहीं होगा।  चेतावनी को ना सुनते हुए वहां के राजा ने महल को इच्छा बना दिया। जिसका छाया भालू नाथ के ध्यान करने की जगह पर पर और गुरु भालू नाथ ने श्राप दिया और तब से इस शहर अवस्थ है नहीं किया गया है। खा जाता है कि गुरु भालू नाथ की समाधि आजतक वहां मजूद है।
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इस शहर के बारे में और एक ओंया कहानी भी है जो राजकुमारी रत्नवती की है। राजकुमारी रारबावती को राजस्थान का गहेना भी माना जाता है। जब राजकुमारी बीबह के युग्य हुआ तब भिविन्न प्रांतों से राजकुमारी के लिए विवाह की प्रस्ताव आने लगी। वहां एक तांत्रिक रेहेटा था वह कोई काले जादुई मै माहिर था। वह तांत्रिक ने राजकुमारी से प्रेम करने लगा था।तांत्रिक का नाम सिंगिया था।वह जानता था कि राजकुमारी कभी भी इससे प्रेम या बिबह नहीं करेगा तो इसने राजकुमारी को आकर्षित करने के लिए एक योजना बनाई।जब तांत्रिक ने राजकुमारी को अपने शेलियो के साथ तेल खरीदने हुए देखा तो तेल को इसने कला जादू के द्वारा मंत्र मुग्ध कर दिया।ताकि राजकुमारी इससे शादी करने के लिए राजी हो गए।लेकिन ऐसा करते हुए राजकुमारी के एक सहेली ने देख लिया और राजकुमारी को बता दिया । राजकुमारी ने तेल ज़मीन पर डाल दिया।जैसे ही तेल ज़मीन पर गिरा ।इसी वक्त एक बड़ा पत्थर ने तांत्रिक को कुचल दिया।मारने की आखरी सांस में महेल की सभी लोगो के मृत्यु के श्राप दिया।

भानगढ़ और बीच एक साल युद्ध हुआ जिसमें राजकुमारी की मृत्यु हो गई।जगह जगह पाई कोई भूटू के किस्से भी सुने जाते है।और कुछ लोगो के कहना है इसी वजह से सरकार ने यह जगह पर परवेश निषेद कर दिया। स्तनियो लोगो का मानना है कि राजकुमारी का पुनार जन्म हुआ है और भानगढ़ का साम्राज्य इसकी लौटने का इंतेज़ार करता है और वो आकर अभिशाप को मुक्त कर देगा ऐसा माना जाता है।

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 अब हैं ही गए है।अगर आप कभी भी भानगढ़ किले पे जाए तो भूल कर भी रात में मत जाइए।

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