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bermuda triangle rahasya hindi


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bermuda triangle rahasya

bermuda triangle rahasya hindi
धरती पर नाजाने क्या क्या है ।इस धरती पर जो हम लोग नहीं जानते।और महासागर के नीचे क्या क्या रहस्य चूपी है कोई नहीं जानते।आज मय उन्हीं रहस्य में से एक रेहस्या के बारे मय बात करूंगा।

बरमूडा ट्राएंगल रहस्य यही वो  जिसके बारे में आज मय बताने जा रहा हो, बरमूडा ट्राएंगल या बरमूडा त्रिकोण नॉर्थ अटलांटिक महासागर के एक हिस्सा है ।लोग इसे डेविल ट्राइएंगल केहीट है ।हमारे वश में इसे ,,"शेतनी त्रिभूज" कहा जाता है। आखिरकार इस बरमूडा त्रिकोण की पहेली सुलझा लिया गेय है।What on Earth नाम का एक साइंस चेनल पर प्रसारित की गेई एक रिपोर्ट के मुताबिक दावा क्या  है कि हवाई जहाज और पानी के जहाज की गायब होने की गठनाए बदोलो की अजीब तरह के मजुदगी के कारण ये गठना बरमूडा की आसपास देखने को मिलती है।

"Hexagonal clouds" यही नाम दिया है है इं बादोलो का।जो हवा में बम विस्फोट की बराबर शक्ति रहक्ती है। विस्फोट होते ही 170 मील प्रति घंटा की रफ्तार वाली हवाएं होती है।बदल और हवा साथ मिलकर पानी और हवा में मजुद जहाज में टकराते है और जहाज कभी नहीं मिलता है।
5 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला ये इलाका कोई सौ सालो से बदनाम रहा है।बैज्ञानिको के मुताबिक इसे बदल का शृष्ठी बहत तेज हवा के के चलते ही इसे बदल बनते है।ये बादल अजीब तरह की दिखाई देते है और अकर में भी बहत बड़ा होता है ।इसलिए इसे  षटकोणीय बादल(Hexagonal clouds) कहा जाता है।

रिपोर्ट में दावा किया जा है की हवा के कारण ये बड़े बड़े बादल बनते गई जो एक बिस्फोट की तरह समुद्र के पानी से टकराते है और सुनामी जैसा बल्कि सुनामी से भी ऊंची लेहेरे पैदा करती है जो स्पेस मय एक दूजे से टकराते है और बहत जय उर्जा पैदा करता है।इस वजह से आज पास जो भी होते है सब बर्बाद कर देते है
साइंटिस्ट के मुताबिक ये बादल बरमूडा ट्राएंगल के दक्षिण की तरफ पैदा करता है।करीब 20 से 55 मील तक ये सफर तय करता है।

बरमूडा त्रिकोण एक रहस्य?

Kolrado state university के प्रोफ़ेसर , मौसम बैज्ञानिक dr. Stiv Miller ने भी इस दावा को समर्थन किया है। इन्होंने भी दावा किया है ये पता लगाना मुश्किल है के ये बादल अपने आप ही पैदा होते है।

बरमूडा ट्राएंगल की कहानी:
बियरमुदा ट्राएंगल की खास बात ये है कि ये सिर्फ एक जगह पड़ी स्थिर नहीं रेहेता ।इसका प्रवाभ ट्रिकुं क्षेत्र के बाहर भी होता है।

अमेरिका का बमवर्षक हो गया गायब:
बीते हुए सैकड़ों सालो में या हजारों लोगो की जान गए है। हर साल यहां औसतन 4 हवाई जहाज 20 समुद्री जहाज रहस्मॉय तरीको से लापता हो जाता है।1945 में अमेरिका की पांच टॉरपीडो विमान ने 14 लोगो के साथ फोर्ट लोडरडेल से बरमूडा ट्राएंगल के उपर से उड़ान भरी थी।उड़ान भरने के लगभग 90 मिनट के बाद एक रेडियो ऑपरेटर को एक सिग्नल मिका की हमारे कम्पास काम नहीं कोर रहा है ।इसके तुरंत बाद ही संपर्क टूट गया। विमानों में 14 लोगो के सहित विमान कोभी वापिस नहीं  आए।

इन विमानों के खोज लेने के लिए 3 विमान बेजे गए पर उन्न विमानों की नामोनिशान तक नहीं मिला। शोधकर्ताओं के यह मानना है कि इस भाग में कोई शक्तिशाली चुम्बक है जो जहाजों  में लगे उपकरण काम करना बंद कर देते है।जिसके वजह से रास्ता भटक जाते है और दुर्गठना का शिकार होते है।

कोलंबास ने सबसे पहले इसे देखा था:
बरमूडा ट्राएंगल रहस्य
बरमूडा ट्राएंगल के बारे में क्रिस्टोफर कलंबास ने इस के बारे में सबसे पहेली सूचना दी थी। कोलंबस ही पहला इंसान है जो सबसे पहले बरमूडा ट्राएंगल का सामना किया था। इन्होंने अपने लिखी किताब में इस त्रिकोण का जिक्र किया था।लिखा था कि जैसे ही बरमूडा ट्राएंगल के पास पहुसे तो उनके कंपास ने काम करना बंद कर दिया था।इसके बाद colombas को आसमान एक रहस्यमय आग का गोला दिखाई दिया जो समुद्र में गिर गया।

अटलांटिक महासागर के इस भाग में जहाजों और हवाई जहाज़ों के गायब होने की गठनाये अबतक का पाई गई जानकारी के मुताबिक साओबी जहाज और हवाईजहाज जब कोई इस जगह पर पहुंचते है  तो उनके रडार ,रेडियो , और कंपास जैसे यंत्र सही तरह से काम नहीं करते है।और धीरे धीरे बंद हो जाते है।उनके अपने दिशा सूचक यंत्र भी बंद हो जाते है। इसके बजाय से अपना रास्ता भटक जाता है अपुर दुघर्टना का शिकार हो जाते है।फिर रहस्यमय क्षेत्र में गुम होकर इस रहस्य को और गहरा कर देते है।कुछ साइंटिस्ट को मानना है कि इस क्षेत्र में भेाैतिक के कुछ नियम बदल जाते है जिसके कारण ये सब गठन होते है।

Bermuda triangle rahasya

कुछ लोग इसे पारलौकिक ताकत का परिणाम भी मानते है। इस पर कोई किताब लिखी गेयी है और फिल्म भी बन चुकी है। बहत तरह के शोध भी होए है लेकिन कोई भी इस नतीजे पर नहीं पहुस पाए है कि आखिर गायब हुए जहाज की पता क्यूं नही लग पाया।इन्हे आसमान निगल जेया या समुद्र निगल गए।और तो और जहाज का मलबा तक नहीं मिला।

बरमूडा ट्राएंगल का इतिहास:
अमेरिका के दक्षिण पूर्वी अटलांटिक महासागर के 25 डिग्री से 45 डिग्री उत्तर तथा देशान्तर 55 से85 डिग्री के बीच फेले 39,000,00 वर्ग किमी की बीच फेली ये जगह। जोकि एक काल्पनिक त्रिकुन जैसी दिखती है,बरमूडा ट्रइएंगल को बरमूडा त्रिभूज के नाम से भी जाना जाता है।इस ट्राएंगल के तीन कोने बरमूडा,मियामी,और जआनार, प्यूटो रिको को स्पर्श करते है।बरमूडा ट्राएंगल स्टेट ऑफ फ्लोरिडा,प्यूर्टोरिको, और अटलांटिक महासागर के बीच बरमूडा दीप के मध्य स्थित है।ज्‍यादातर घटनाएं त्रिकोण की दक्षिणी तरफ के सीमा पर होते है।

बरमूडा ट्राएंगल अब तक कोई जहाज और विमानों को निगल लिया है। जिसके बारे में अबतक पता नहीं चला है।सबसे पहले 1872 में जहाज थे मेरी बरमूडा ट्राएंगल में लापता हुए था।जिसके बारे मय कुछ नहीं पता चल पाया। बरमूडा ट्राएंगल का रहस्य तब पहेली बर सामने आया ,जब 16 दिसंबर 1950 को पहेली बर अखबार में लिखी गई  थी ।इसके दो साल बाद  "सी मिस्ट्री अट ओवर बैक डोर" पत्रिका में जार्ज एक्स सेंड एक संक्षिप्त लेख भी प्रकाशित किया था।
इस लेख में कोई हवाई जहाज और समदड़ी जहाज समेत जलसेना के पांच टीबीएम विमानों " फ्लाइट 19" के लापता होने का जिक्र किया था। फ्लाइट 19 5 दिसंबर 1945 को लेफ्टिनेंट चार्ल्स टेलर के नेतृत्व में 14 लोग के साथ फोर्ट लॉडरडेल,, फ्लोरिडा से बरमूडा ट्राएंगल के ऊपर से उड़ान भारी थी और फिर वो लोग कभी वापिस नहीं आए। फ्लाइट 19 रेडियो से जो अंतिम शब्बद सुनाई दिया था वो थी " हमें पता नहीं है हम कहा है,सबकुछ गलत हो जा,पानी हरा है और कुछ भी सही होता नजर नही आ रहा है वैसा नहीं दिख रहा जैसा होना चाहिए।हम नहीं जानते कि पश्चिम किस दिशा में है।हमें कोई भी दिशा समाज में नहीं  आ रहे है। हमें अपना अड्डे से 225 मील दूर उत्तर पूरब में होना चाहिए ,लेकिन ऐसा करता है कि ............"और इसके बाद आवाज़ अनी बंद हो गईं।

                       
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जानकारी के म के बरमूडा ट्राएंगल एक टमे मशीन का सौर है। जैसे धरती पर कोई एक ब्लैकहोल कि तरह है। जो दूसरी दुनिया मै जाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आसान भाषा में ये एक टाइम जोन की तरह है।

इस टाइम जोन का इस्तेमाल इंसान नहीं बल्कि दूसरे दुनिया के लोग करते है।यानी कि धरती से लाखों कोरोरो किमी दूर बसे हुए अलियैन के लिए एक पोर्टल है ।इस को समाज ने के लिए साइंटिस्टों की तथ्य जानने की बेहद जरूरी है जो सालो कि जांच के बाद सामने आए है।साल में 25 बर ऐसा होता है जब bermuda ट्राएंगल की आकर सिर्फ ढाई बर्ग मील तक ही जाती है।मतलब 15000 बरग मील से गठकर ढाई मील हो जाते है और ये सिर्फ 28मिनट तक ही रहेता है।इस वक्त जो भी विमान या जहाज बरमूडा ट्राएंगल के के पास से गुजरते है तो एक भयंकर शक्तिशती इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगे उसे अपनी तरफ खिस लेता है।

कहा तो जाता है कि अमेरिका कि एक बहत बड़ी सीक्रेट लेबोटरी है। जहा पर एरिया 51 की तरह एलियैन से जुड़ी रिचार्ज भी किया जाता है। अब यह पाने वाले हेक्सागोनल क्लाउड्स के कारण ऐसी घटनाओं का दावा किया गया है , लकिं फिलहाल हमारे पास ऐसा कोई ज्ञान,मशीन,या उपकरण नहीं जो इस सिद्धांत की सच्चाई को जांच कर सके।


साइंटिस्ट चांद,मंगल तक पहुंच गए है लेकिन हमारे धरती पर हो रहा इस रह्यमई जगह के रहस्य को नही सुलझा सके। हम अपने धरती पर ही असहाय है रहस्य को सुलझाने की।

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